Saturday, April 18th, 2026

सारी कोशिशें रहीं नाकाम, ट्रंप ने नहीं दी पाकिस्तान को AMRAAM मिसाइल की मंजूरी

वाशिंगटन

पाकिस्तान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चापलूसी करने में कोई कसर नहीं छोड़ी. शहबाज और मुनीर अमेरिका तक गए और उन्होंने रेयर अर्थ मिनरल का खजाना भी सौंप दिया. लेकिन इसके बावजूद अब अमेरिका ने भारत को झटका दिया है. भारत में अमेरिकी दूतावास ने शुक्रवार को एक बयान जारी किया. अमेरिकी दूतावास ने उन मीडिया रिपोर्टों पर स्पष्टीकरण जारी किया है, जिनमें दावा किया गया था कि अमेरिका पाकिस्तान को एडवांस एयर-टू-एयर मिसाइल्स (AMRAAM) बेचने जा रहा है. दूतावास ने स्पष्ट कहा है कि यह जानकारी गलत व्याख्या पर आधारित है और पाकिस्तान को किसी प्रकार की नई या उन्नत मिसाइल प्रणाली नहीं दी जा रही है.

अमेरिकी दूतावास की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, 30 सितंबर 2025 को अमेरिकी ‘डिपार्टमेंट ऑफ वार’ (जो मिलिट्री कॉन्ट्रैक्ट की सार्वजनिक सूची जारी करता है) ने कई कॉन्ट्रैक्ट्स की जानकारी साझा की थी. उसी सूची में पाकिस्तान से जुड़ा एक विदेशी मिलिट्री बिक्री कॉन्ट्रैक्ट संशोधन भी शामिल था, लेकिन उसका उद्देश्य केवल रखरखाव और स्पेयर पार्ट्स की आपूर्ति था. दूतावास ने स्पष्ट शब्दों में कहा है- ‘यह कॉन्ट्रैक्ट किसी नई मिसाइल डिलीवरी या पाकिस्तान की मौजूदा हवाई युद्ध क्षमता को अपग्रेड करने से जुड़ा नहीं है. सस्टेनमेंट का मतलब केवल मौजूदा सिस्टम के सपोर्ट से है, अपग्रेड से नहीं.’

नहीं मिलेंगी नई मिसाइलें

बीते कुछ दिनों से कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों में यह अटकलें लगाई जा रही थीं कि अमेरिका पाकिस्तान को AIM-120 AMRAAM मिसाइलें उपलब्ध करा रहा है. रिपोर्ट्स में बताया जा रहा था कि इससे पाकिस्तान के F-16 फाइटर जेट की क्षमता बढ़ेगी और क्षेत्रीय शक्ति संतुलन में बदलाव आएगा. नई मिसाइल सेल की खबरों ने इस धारणा को हवा दी थी कि अमेरिका और पाकिस्तान के बीच रिश्ते फिर से गर्म हो रहे हैं. हालांकि, अमेरिकी दूतावास के बयान ने इन तमाम अटकलों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि कॉन्ट्रैक्ट का उद्देश्य केवल सिस्टम का रखरखाव, उपकरण अपडेट और स्पेयर पार्ट्स की आपूर्ति है. इसे किसी भी रूप में पाकिस्तान की हवाई शक्ति बढ़ाने के कदम के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए.

अमेरिकी अधिकारियों ने यह भी बताया कि इस तरह के कॉन्ट्रैक्ट सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं, जो कई देशों के साथ चलते रहते हैं. इसमें हथियार प्रणाली के रखरखाव, परीक्षण, और सप्लाई चेन के सुचारु संचालन से जुड़े तकनीकी अपडेट शामिल होते हैं. बयान में यह भी जोड़ा गया कि कुछ मीडिया संस्थानों ने ‘कॉन्ट्रैक्ट मॉडिफिकेशन’ शब्द का गलत अर्थ निकालते हुए इसे नए हथियारों की सप्लाई समझ लिया.

 

 

#Pakistan US Missile#AMRAAM missile

Source : Agency

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