Saturday, April 18th, 2026

चौथी पत्नी को ₹30,000 प्रति माह गुजारा भत्ता देंगे सांसद मोहिबुल्लाह नदवी, हाईकोर्ट का फैसला

इलाहाबाद
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रामपुर के समाजवादी पार्टी (सपा) सांसद मोहिबुल्लाह नदवी के खिलाफ उनकी पत्नी रूमाना नदवी द्वारा दायर भरण-पोषण याचिका पर बड़ा फैसला सुनाया है. अदालत ने आदेश दिया है कि सांसद नदवी को अपनी चौथी पत्नी रूमाना नदवी को हर महीने ₹30,000 गुजारा भत्ता देना होगा. रूमाना का मायका आगरा में है. 

यह आदेश अदालत ने उस समय दिया जब रूमाना नदवी ने अपने पति के खिलाफ भरण-पोषण का दावा दायर किया था. हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान मामले को सुलझाने के लिए इसे मध्यस्थता एवं सुलह केंद्र भेजा है और दोनों पक्षों को तीन महीने का समय दिया गया है ताकि विवाद का सौहार्दपूर्ण समाधान निकल सके. अदालत ने यह भी कहा कि जब तक अंतिम निर्णय नहीं आता, तब तक सांसद को अपनी पत्नी को हर महीने ₹30,000 की भरण-पोषण राशि का भुगतान नियमित रूप से करना होगा. 

सुनवाई के दौरान सांसद की ओर से पेश वकील नरेंद्र कुमार पांडे ने कहा कि यह मामला वैवाहिक विवाद से जुड़ा है और उनका मुवक्किल इसे आपसी सहमति से सुलझाना चाहता है. अदालत ने दलीलों को ध्यान में रखते हुए यह आदेश दिया कि ऐसे पारिवारिक विवादों को बातचीत और मध्यस्थता के माध्यम से सुलझाने का प्रयास किया जाना चाहिए. 

कोर्ट ने मोहिबुल्लाह नदवी को निर्देश दिया है कि वे 30 दिनों के भीतर ₹55,000 का डिमांड ड्राफ्ट मध्यस्थता केंद्र में जमा करें. इसमें से ₹50,000 उनकी पत्नी को पहली पेशी पर दिए जाएंगे, जिनमें ₹30,000 पिछली बकाया भरण-पोषण राशि के रूप में समायोजित होंगे, जबकि ₹5,000 मध्यस्थता केंद्र में जमा रहेंगे. 

इस बीच, रूमाना नदवी ने 'आजतक' से बातचीत में अपने वैवाहिक जीवन की पूरी कहानी साझा की. उन्होंने बताया कि उनकी शादी मोहिबुल्लाह नदवी से एक रिश्तेदार की मध्यस्थता के बाद हुई थी. शादी के एक साल बाद एक बेटा हुआ. रूमाना के मुताबिक, “मेरे पति ने मेरे पिता को फोन कर कहा कि वक्फ से जुड़ा एक मसला चल रहा है, इसलिए कुछ समय के लिए रूमाना को मायके भेज रहे हैं.” पिता ने इस पर सहमति दे दी और रूमाना मायके चली गईं. 

लेकिन उसके बाद, रूमाना के अनुसार, मोहिबुल्लाह नदवी ने कभी पलटकर नहीं देखा. उन्होंने बताया कि शुरुआत में सांसद की तरफ का एक व्यक्ति आया था, जिसने मसले को निपटाने की बात की थी, लेकिन मध्यस्थता की पेशकश मान्य नहीं हुई. बाद में जब उन्होंने अपने पति से संपर्क करने की कोशिश की, तो उनके सभी मोबाइल नंबर बंद मिले. 

रूमाना ने बताया कि इसके बाद उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया और अपने हक के लिए मुकदमे किए. पहले अदालत ने ₹4000 प्रतिमाह गुजारा भत्ता तय किया था, जिसे 2020 में बढ़ाकर ₹10,000 किया गया. इसी आदेश के खिलाफ अपील हाईकोर्ट में की गई थी, जिस पर अब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नया फैसला सुनाते हुए ₹30,000 प्रतिमाह गुजारा भत्ता देने का निर्देश दिया है. 

 

#Rumana Nadvi

Source : Agency

आपकी राय

5 + 2 =

पाठको की राय