Saturday, April 18th, 2026

आरक्षण पर नई बहस: SC ने तेलंगाना सरकार के फैसले को ठहराया असंवैधानिक

नई दिल्ली 
तेलंगाना में आरक्षण की सीमा 50 फीसदी से ज्यादा बढ़ाए जाने को सुप्रीम कोर्ट ने मंजूरी नहीं दी है। तेलंगाना सरकार के फैसले को हाई कोर्ट ने खारिज किया था, जिसे शीर्ष अदालत में रेवंत रेड्डी सरकार ने चैलेंज किया था। अब उसे शीर्ष अदालत में भी झटका लगा है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने अर्जी खारिज करते हुए कहा कि जाति आधारित आरक्षण की 50 फीसदी की तय सीमा है और उसका उल्लंघन नहीं किया जा सकता। 1992 के इंदिरा साहनी केस में सुप्रीम कोर्ट ने जातिगत आरक्षण की 50 फीसदी सीमा का आदेश दिया था।

तेलंगाना सरकार ने अदालत में यह दलील दी कि उसने 42 फीसदी ओबीसी आरक्षण तय किया है, जो एक नीतिगत निर्णय है। इससे राज्य के पिछड़े वर्गों को स्थानीय निकाय में उचित प्रतिनिधित्व मिल सकेगा। इस आरक्षण के साथ ही राज्य में कुल कोटा 67 फीसदी हो जाता है। इसी पर आपत्ति जताते हुए ओबीसी आरक्षण बढ़ाने के प्रस्ताव को हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया था। अब ऐसा ही फैसला सुप्रीम कोर्ट ने भी दिया है। इस तरह हाई कोर्ट की ओर से आरक्षण बढ़ाने के फैसले पर लागू की गई अंतरिम रोक अगले आदेश तक जारी रहेगी। उच्च न्यायालय ने 9 अक्तूबर को हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार 4 सप्ताह में जवाब देने का मौका दिया था।

अब हाई कोर्ट की सुनवाई पर रहेगी नजर, राज्य सरकार को देना है जवाब
अब एक बार फिर से हाई कोर्ट की सुनवाई पर नजर होगी कि अब राज्य सरकार का क्या जवाब होगा और उस पर अदालत का रुख क्या रहेगा। तेलंगाना सरकार की ओर से ओबीसी कोटा 42 फीसदी किए जाने को कई संगठनों और लोगों की ओर से चैंलेंज किया गया था। इन लोगों का कहना था कि जातिगत आरक्षण की लिमिट 50 फीसदी है, जो इस फैसले से बढ़कर 67 फीसदी हो जाता है। इसलिए इसे रोका जाना चाहिए। फिलहाल शीर्ष अदालत के फैसले पर तेलंगाना सरकार का कोई रिएक्शन नहीं आया है।

 

 

#Setback for Congress government

Source : Agency

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